कुछ अनकही शायरियाँ.........भाग 6

Thursday, June 9, 2011











उनकी हर एक अदा ने हमको दीवाना बना दिया,
जो शमा की याद में जल जाए वो परवाना बना दिया,
हमने भी कुछ ऐसा दीवानापन दिखाया,
की चाहत में उनकी एक नया अफसाना बना दिया...

वो पहली बार तुमने जब प्यार से मुस्कुरा कर मुझे देखा,
बस तभी से गुलशन में बहार छाई है,
उस एक अदा ने तुम्हारी जाने क्या जादू सा किया है,
की पतझड़ में भी सावन की फुहार आई है....

दिन के साथ रात नहीं होती,
सितारों से दिल की बात नहीं होती,
जिन्हें चाहते हैं हम जान से ज्यादा,
खुदा जाने क्यूँ उनसे ही मुलाक़ात नहीं होती...

उम्र की राह में इंसान बदल जाते है,
वक़्त की आंधी में तूफ़ान बदल जाते है,
सोचता हूँ की उन्हें इतना याद ना करूँ,
लेकिन आँख बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं..

ग़म के आँसू दिखा नहीं सकते,
अपना हक उन पर जता नहीं सकते,
कितने अनमोल हैं वो हमारी निगाहों में,
ये बात हम उनको बता नहीं सकते....

सौ सौ उम्मीदें बंधती हैं एक-एक निगाह पर,
मुझको प्यार से ऐसे ना देखा करे कोई...

देखो ना आँख भर के किसी की तरफ कभी,
तुमको खबर नहीं जो तुम्हारी नज़र में है...

फिज़ा को जैसे कोई राग चीरता जाए,
तेरी निगाह दिल में ऐसे उतर गयी...

जैसे मेरी निगाह ने देखा ना हो तुझे,
महसूस ये हुआ तुझे हर बार देख कर...

कोई ए खुदा इतना प्यारा ना हो,
कि बिछड़ जाएँ तो जी सकें,ना मर सकें....

कहा नहीं जाता तुझको बेवफा भी,
ज़रा सी कमी इधर भी थी...

जिनको है मलाल कि कोई हमसफ़र नहीं,
मैं कहता हूँ कि उनको खुदा ने ज़िन्दगी बख्श दी...

सुकून-ए-दिल ढूँढने जाऊं मैं किस तरफ,
यहाँ भी,वहाँ भी,तेरी यादें हर तरफ...

जब तन्हा कभी होता हूँ,दिल को तुम्हारी याद सताती है,
जब देखता हूँ आइना,उसमे भी सूरत तेरी ही नज़र आती है...

जिसे हमने चाहा था,जबसे वो बेवफा बन गया,
ये दिल,दिल ना होकर एक चिराग-ए-ग़म बन गया...




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