कुछ अनकही शायरियाँ.........भाग 7

Friday, June 10, 2011

यादें कभी बेवफा नहीं होती,
सूरज डूबे बिना रात नहीं होती,
कभी दिल मत तोडना किसी का,
क्यूंकि दिल के टूटने की आवाज़ नहीं होती..

हर एक सजदा मक़बूल-ए-खुदा हो जाए,
आपकी दुआ के संग रब की रज़ा हो जाए,
ज़िन्दगी में मिलें आपको वो खुशियाँ,
की हज़ारों साल तक ग़म आपसे खफा हो जाए....

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर सुनहरी यादों का एहसास रहने दो,
सुरूर दिल में और जुबां पर मिठास रहने दो,
यही फलसफा है जीने का,कि ना रहो उदास,
ना किसी को उदास रहने दो...

काँटा ना होता तो फूलों कि हिफाज़त ना होती,
अँधेरा ना होता तो रौशनी कि ज़रूर ना होती,
अगर मिल जाती हर खुश इस दुनिया में,
तो दिल कि मुलाकात दर्द से ना होती...

हाथों में होती हैं लकीरें हज़ार,
किसी में ग़म तो किसी में खुशियों कि बहार,
ना जाने वो कौन सी लकीर है मेरे हाथ में,
जिसमें खुदा ने लिख दिया आप जैसे दोस्त का प्यार....

इश्क और दोस्ती मेरी ज़िन्दगी का गुमान है,
इश्क मेरी रूह,दोस्ती मेरा ईमान है,
इश्क पर कर दूँ फ़िदा,अपनी सारी ज़िन्दगी,
मगर दोस्ती पर तो मेरा इश्क भी कुर्बान है.....

गीत कि ज़रुरत महफ़िल में होती है,
प्यार कि ज़रुरत दिल में होती है,
बिना दोस्त के अधूरी है यह ज़िन्दगी,
क्यूंकि दोस्त कि ज़रुरत हर पर महसूस होती है......

तेरी जुदाई में दिल बेकरार ना करूँ,
तू हुक्म दे तो तेरा इंतज़ार ना करूँ,
बेवफाई करनी हो तो इस क़दर करना,
कि तेरे बाद मैं किसी ओर से प्यार ना करूँ...

आज हैं,कल ना जाने कहाँ होंगे,
हम वो परिंदे हैं जो आसमान में खो जायेंगे,
दिलों कि डोर से ऐसा ना बाँधो हमें,
कल ना होंगे तो आँसू निकल आयेंगे...

0 comments: