जागरण का वैज्ञानिक महत्व

Thursday, February 17, 2011

जितनी भी रात्रियां जागरण के लिए श्रेष्ठ मानी गई उनमें, नवरात्रि को छोड़कर सभी पूर्णिमा, अमावस्या एवं एकादशी तिथि को पड़ती है। यह बड़े महत्वपूर्ण दिन होते हैं। इनमें चंद्रमा और सूर्य एक विशेष कोण पर उपस्थित होते हैं। जो व्यक्ति के मन और बुद्धि पर प्रभाव डालते हैं। सोते समय बुद्धि सुप्त होती है। अर्थात् ग्रहों का प्रभाव इन पर आसानी से होता है। परंतु जागते रहने से सचेत बुद्धि दिमाग होता है। अत: सूर्य, चंद्र का प्रभाव इस पर नहीं पड़ता। इन दिनों में उपवास भी करना चाहिए।

Did You Know?

1. The Titanic was the first ship to use the SOS signal.

2. The reason honey is so easy to digest is that it’s already been digested by a bee. while pumping to squirt blood 30 feet!!

3. Dalmatians are born without spots.

4. The roar that we hear when we place a seashell next to our ear is not the ocean, but rather the sound of blood surging through the veins in the ear.

LOVE Quotes

All you need is love.
-John Lennon

If only you could love enough you would be the happiest and most powerful being in the world . . .
-Emmet Fox

Everyone has two choices. We're either full of love... or full of fear.
-Albert Einstein

The moment you have in your heart this extraordinary thing called love and feel the depth, the delight, the ecstasy of it, you will discover that for you the world is transformed.
-J. Krishnamurti

The important thing is not to think much but to love much; do, then, whatever most arouses you to love.
-St. Teresa of Avila

Love is a fruit in season at all times.
-Mother Teresa

And now here is my secret, a very simple secret; it is only with the heart that one can see rightly, what is essential is invisible to the eye.
-Antoine de Saint-Exupery

Love is life. And if you miss love, you miss life.
-Leo Buscaglia

There is no remedy for love but to love more.
-Henry David Thoreau

'Tis better to have loved and lost than never to have loved at all.
-Alfred Lord Tennyson

Learning to love yourself it is the greatest love of all.
-Whitney Houston

Love possesses not nor would it be posessed; for love is sufficient unto love.
-Kahlil Gibran

हनुमान चालीसा सिखाती है लाइफ मैनेजमेंट

हमारे जीवन में कई शब्द ऐसे गुजरते हैं जो होते तो सरल हैं लेकिन उनके अर्थ गहरे होते हैं। श्रीहनुमानचालीसा का प्रत्येक शब्द ऐसा ही है। हर शब्द में दर्शक, दिशा और व्यावहारिक जीवनशैली के संकेत हैं। तुलसीदास केवल कवि नहीं थे वे ऋषि होने के भाव को स्पर्श कर गए थे। जीवन जीने और कर्म करने की समझ देने वाले सृजनकर्ता थे।

हनुमानजी उनके पथ प्रदर्शक थे और हनुमानचालीसा लिखकर उन्होंने हमारा मार्गदर्शन कर दिया। इसीलिए हनुमानचालीसा जैसा छोटा-सा साहित्य करोड़ों लोगों का गाईड और गॉड फादर दोनों बन गया। समस्याओं और घटनाओं से निपटने की हनुमानजी की अपनी विशिष्ट शैली है। यदि कोई इसे समझकर जीवन में उतारे तो वह अपने यश और शौर्य में वृद्धि कर सकता है।

यह सवाल अनेक लोगों के मन में है कि हनुमानजी वानर हैं, मनुष्य हैं या अवतार? वे वन में रहने वाले नर हैं। उनका वानर रूप मनुष्यों का ही रूप था। मानव बनकर ही मानव को लीला का अर्थ सही तरीके से समझाया जा सकता है। दुनियाभर के धर्मों में जब भी कोई परम शक्ति या देवता मनुष्य बनकर आता है तो उसका उद्देश्य यही रहता है कि मनुष्य यह समझ सके परमात्मा के निकट पहुँचने का मानवीय मार्ग क्या है क्योंकि मनुष्य होना जितने गौरव की बात है उतनी ही तकलीफ का भी मामला है।

जानवर श्रेष्ठ होगा तो ज्यादा से ज्यादा अच्छा जानवर बन जाएगा पर यदि मनुष्य उत्तम बना तो देवत्व को भी प्राप्त कर सकता है और पतित हुआ तो पशु से भी अधिक गिर सकता है। अपनी ही सीमाओं के पार जाने की असीम संभावनाएं जिस मनुष्य में छिपी हैं उसके लिए हनुमानजी रोल मॉडल हैं।

घूंघट की परंपरा कब से और क्यों?

घूंघट भारतीय परंपरा में अनुशासन और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। घर की बहुओं को परिवार के बड़ों के आगे घूंघट निकालना होता है, ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह अनिवार्य है ही साथ ही कई महानगरीय परिवारों में भी ऐसा चलन है। सवाल यह है कि भारतीय परंपरा में घूंघट कब और कैसे आया? क्या सनातन समय से यह परंपरा चली आ रही है या फिर कालांतर में यह प्रचलन बढ़ा है?वास्तव में घूंघट हिंदुस्तान पर आक्रमण करने वाले आक्रमणकारियों की ही देन है। पहले राज्यों में आपसी लड़ाइयां और फिर मुगलों का हमला।

इन दो कारणों ने भारत में पूजनीय दर्जा पाने वाले महिला वर्ग को पर्दे के पीछे कर दिया। भारतीय महिलाओं की सुंदरता से प्रभावित आक्रमणकारी अत्याचारी होते जा रहे थे। महिलाओं के साथ बलात्कार और अपहरण की घटनाएं बढऩे लगीं तो महिलाओं की सुंदरता को छिपाने के लिए घूंघट का इजाद हो गया। पहले यह आक्रमणकारियों से बचने के लिए था, फिर परिवार में बड़ों के सम्मान के लिए और धीरे से इसने अनिवार्यता का रूप धारण कर लिया। आक्रमणकारी चले गए, देश आजाद हो गया लेकिन महिलाओं के चेहरों पर पर्दा अब भी कायम है।

क्यों बनी जमीन पर बैठकर खाना खाने की परंपरा?

भारत में प्रचीन समय से ही जमीन पर बैठकर खाना खाने की परंपरा थी। लेकिन आज पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण डायनिंग टेबल पर खाना खाने की संस्कृति हमारे यहां बस चुकि है।हमारे पूर्वजो ने जो भी परंपरा बनाई थी उसके पीछे कोई गहरी सोच थी।

इसलिए जमीन पर सुखासन में बैठकर खाना खाने की परंपरा बनाई गई। जमीन पर सुखासन अवस्था में बैठकर खाने से वे कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर शरीर को ऊर्जावान और स्फू र्तिवान बना सकते हैं।

जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम एक विशेष योगासन की अवस्था में बैठते हैं, जिसे सुखासन कहा जाता है। सुखासन पद्मासन का एक रूप है। सुखासन से स्वास्थ्य संबंधी वे सभी लाभ प्राप्त होते हैं जो पद्मासन से प्राप्त होते हैं।

- बैठकर खाना खाने से हम अच्छे से खाना खा सकते हैं।
- इस आसन से मन की एकाग्रता बढ़ती है।
- इस तरह खाना खाने से मोटापा, अपच, कब्ज, एसीडीटी आदि पेट संबंधी बीमारियों में भी राहत मिलती है।
- सुखासन से पूरे शरीर में रक्त-संचार समान रूप से होने लगता है। जिससे शरीर अधिक ऊर्जावान हो जाता है।
- इस आसन से मानसिक तनाव कम होता है और मन में सकारात्मक विचारों का प्रभाव बढ़ता है।
- इससे हमारी छाती और पैर मजबूत बनते हैं।
- सुखासन वीर्य रक्षा में भी मदद करता है।

कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं

Saturday, February 5, 2011

कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .............
एक दोस्त है सच्चा-सच्चा सा,
एक ख्वाब है कच्चा पक्का सा,

जीवन कि आप-धापी में,
जो साथ निभाए निश्चल मन से,
अवचेतन मन में मेरे समाया,
एक ख्याल है कोई अपना सा,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ................

जब शाम ढले उदासियों का मंज़र
जीवन को ओढ़े जाता है,
तब उम्मीदों की लौ जलाकर,
जो खुशियों को ले आता है,
मेरी भावनाओं को समझते हुए,
जो पहचान नयी मेरी बनता है,
एक मुसाफिर है ऐसा अपना सा,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ...........

हवा का एक सुहाना झोंका है
फूलों कि प्यारी खुशबू लिए,
कलरव करती चिड़ियों कि धुन पर,
बांसुरी बजाता बेगानों सा
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं...........
एक दोस्त है सच्चा-सच्चा सा,
एक ख्वाब है कच्चा पक्का सा

एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है
और जीने का एक नया मकसद दे जाता है,
जो साथ होकर भी ख़ास है,
एक एहसास है दिल का अच्छा सा,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं..............

तलाश है मेरी इन आँखों की,
जो पूरा हुआ एक सपना सा,
कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं..............
एक दोस्त है सच्चा-सच्चा सा,
एक ख्वाब है कच्चा पक्का सा

रौनकें

मेरी दुनिया में हो जाएँ यह सारी रौनकें,
बस उनका ही नाम लेती हैं यह सारी रौनकें,
मेरे आँगन में जो जलाता है दिए प्यार के,
उसी के दम से मुस्कुराती हैं यह सारी रौनकें,
जिस के क़दमों कि धनक से ही गलियाँ हँस पड़ी,
उसकी खुशबू से महकती हैं यह सारी रौनकें,
बेशकीमती ज़िन्दगी का सरमाया है वोह,
जिस का हँस हँस कर ज़िक्र करती हैं यह सारी रौनकें,
वोह अनोखे रंग भरता है दिल-ए-एहसास में
उनके होने से सँवरती हैं यह रौनकें,
वोह ही सब कुछ है मेरा,वोह नहीं तो कुछ भी नहीं,
चुपके-चुपके मुझसे कहती हैं यह रौनकें..

सोच लेना

सोच लेना कदम बढाने से पहले,
कहीं खो ना जाओ मंजिल आने से पहले,
ख़ास किसी दोस्त से महरूम हो ना जाओ कहीं,
यह सोच लेना उसे आजमाने से पहले,
तुम्हारे सीने में भी धड़कता है एक दिल,
यह सोच लेना किसी का दिल दुखाने से पहले,
उम्र भर कौन किसी के लिए रोता है,
लोग सिर्फ आंसू बहाते हैं दफनाने से पहले